त्रिभाषा फॉर्मूले पर मची सियासी रार से सरकार आई बैकफुटपर, चला यह नया दांव

नई दिल्ली: बड़े पैमाने पर आलोचनाओं का सामना करने के बाद सरकार ने सोमवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 को संशोधित किया। तमिलनाडु और महाराष्ट्र के राजनीतिक नेताओं ने प्रस्तावित नीति को लेकर केंद्र पर निशाना साधा और तीन भाषाओं के फार्मूले की आलोचना की। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और तमिलनाडु के कई नेताओं ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है और इसलिए उसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने समाचार एजेंसी बताया, “हमारा किसी पर कोई भाषा थोपने का कोई इरादा नहीं है। हम सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहते हैं। यह समिति द्वारा तैयार एक मसौदा है, जिसे सरकार द्वारा सार्वजनिक प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद तय किया जाएगा।” ।

डीएमके प्रमुख स्टालिन ने तीन-भाषा के फार्मूले पर, जिसमे प्राथमिक कक्षा से कक्षा 12 वीं तक हिंदी को ‘अनिवार्य’ बनाने की पहल की जा रही है, कहा कि यह निर्णय देश को विभाजित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु ने हमेशा ‘दो-भाषा’ के फार्मूले का पालन किया है और इसके कार्यकर्ता हिंदी को ‘थोपने’ के कदम का विरोध करेंगे।

इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मसौदा नीति पर बहस में शामिल हो गईं और कहा कि केंद्र सरकार प्राचीन तमिल के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि “शिक्षा समिति की मसौदा रिपोर्ट सार्वजनिक सुनवाई के बाद लागू की जाएगी। प्रधान मंत्री की पहल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत सभी भारतीय भाषाओं को विकसित करना चाहते हैं। केंद्र सरकार प्राचीन तमिल के विकास का समर्थन करेगी”।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1
Save our number on your phonebook and send "START NEWS". You will now receive all our news If you wish to stop receive than just send "STOP NEWS"
I accept that I will receive messages in selected messenger and my data will be processed.
Powered by