यूएन द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद अब क्या होगा मसूद अज़हर का?

नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध कर दिया है। भारत के लिए इसे बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने में भारत को एक दशक का समय लगा। सबसे पहले यूपीए सरकार में हुए मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय में वर्ष 2009 में हाफिज सईद के साथ मसूद अज़हर को भी वैश्विक आतंकियों की सूची में रखने का प्रस्ताव रखा गया था।

फ़िलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनिया भर के शीर्ष राजनीतिक नेताओं ने मसूद अजहर को आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के UNSC के फैसले का स्वागत किया।

जैसे ही संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने घोषणा की, कई नेताओं ने इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया।

अब प्रश्न यह उठता है कि वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद अब मसूद अजहर के साथ क्या होगा ? यूएनएससी के प्रस्ताव 1267, जिसके तहत मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, के अनुसार किसी भी व्यक्ति या संगठन को वैश्विक आतंकी के रूप में सूचीबद्ध किये जाने पर उसे कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के बाद, उस पर यात्रा प्रतिबंध लगाया जाएगा; यह पारित संकल्प के तहत सबसे बुनियादी प्रतिबंधों में से एक है।

अज़हर की संपत्ति और आर्थिक संसाधनों को पहले दिशानिर्देशों के अनुसार जांच और जब्त किया जाएगा।

हालांकि मसूद अजहर की जैश ए मोहम्मद को 2002 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक वैश्विक आतंकी समूह के रूप में मुकदमा चलाया जा चुका है, लेकिन ताजा घटनाक्रम में अब अधिकारियों को मसूद अज़हर के अधिकारों पर अंकुश लगाने के अलावा उसकी की व्यक्तिगत संपत्ति पर शिकंजा कसने की अनुमति मिलती है।

कोई भी संस्था या व्यक्ति अज़हर को हथियार या गोला-बारूद हस्तांतरित या बेच नहीं पाएगा।

भारत की फाइल में संकेत दिया गया है कि मसूद अजहर सक्रिय रूप से आतंकी फंडिंग ऑपरेशन में शामिल है, जिसे उसके आतंकी समूह के अलग-अलग विंगों के तहत घटनाओं के माध्यम से उठाया गया है, जिसमें छात्र गुट भी शामिल हैं। उसके खिलाफ नए प्रतिबंधों के तहत इस तरह के संचालन को सख्ती से प्रतिबंधित किया जाएगा।

पाकिस्तान, जिसने मसूद अजहर के खिलाफ प्रतिबंध को मजबूती से रोका था, पर कई मौकों पर आतंकी मास्टरमाइंड को बचाने का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा सूची से तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी क्योंकि अब पाकिस्तान को अजहर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को तुरंत लागू करना होगा।

सूचीबद्ध होने के दिन से, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य मसूद अजहर पर उपरोक्त प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य होंगे।

हालाँकि 2009 में परिषद् द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद भी हाफ़िज़ सईद ना सिर्फ़ पाकिस्तान में खुले आम घूमते रहे हैं, बल्कि उन्होंने वहां एक राजनीतिक पार्टी भी बना ली। इस पार्टी ने पिछले साल जुलाई में हुए चुनावों में नेशनल असेंबली के लिए 80 उम्मीदवारों और प्रांतीय विधान सभाओं के लिए 185 उम्मीदवारों को उतारा था।

भारत के लिए फ़िलहाल बस यही फायदा है कि मसूद अजहर पर प्रतिबंध से भारत और आसपास के देशों में आतंकवाद को रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही भारत की निवर्तमान सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता कर लोकसभा चुनाव में अपने लिए वोट तलाशने का मौका नहीं छोड़ेगी। जैसा कि पुलवामा हमले व बालाकोट एयर स्ट्राइक पर कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के तमाम नेता चुनावी जनसभाओं में भुना चुके हैं। हालाँकि आचार संहिता के उल्लंघन मामले में चुनाव आयोग मोदी व अमित शाह को क्लीन चिट दे चुका है।

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