किसानों के हौसले के सामने झुकी मोदी सरकार, किसानों को मिली दिल्ली आने की इजाज़त

दिल्ली कूच पर अड़े पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्य के किसानों को दिल्ली जाने की अनुमति केंद्र सरकार की ओर से मिल चुकी है। किसान बिल का विरोध कर रहे किसानों को रोकने में नाकाम पुलिस ने उन्हें दिल्ली जाने की इजाजत दे दी है। हक की लड़ाई में किसानों को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बर्बरता करते हुए आंसू गैस और पानी के बौछार से रोकने की कोशिश की जब इन सब के बावजूद पुलिस किसानों को रोक पाने में नाकाम हुई तब पुलिस ने बल का प्रयोग करते हुए लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस की बर्बरता से कई किसान को गंभीर चोटें आई तो वहीं कई किसान घायल हो गए पर सरकार की किसान विरोधी नीतियां किसानों के हौसले को कम नहीं कर पाई।

आंदोलन और किसानों को बदनाम करने के लिए भाजपा संगठन और मीडिया ने भी विरोधी भूमिका के साथ आंदोलन को आतंकी संगठन खालिस्तान और विपक्ष का सहयोगी बताया। TV9 भारत वर्ष न्यूज़ चैनल ने तो खालिस्तान का मोहरा बताने वाला प्रोग्राम चला दिया।सोशल मीडिया पर भी विरोध को लेकर कई तरह की प्रतिक्रिया आ रही है।

इतना ही नहीं किसान विरोधी बिल और किसानों पर अत्याचार की आग अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी है| हरियाणा से लगे उत्तर प्रदेश के मथुरा और बागपत में किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम का एलान कर दिया। जिसके बाद आंदोलन की आग अब लखनऊ तक पहुंच गई जहां किसान बिल और किसान पर अत्याचार को लेकर भारी संख्या में किसानों का प्रदर्शन शुरू हो गया।

किसानों के समर्थन में अब उत्तर प्रदेश के जिला शहर इकाइयां और प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की बात करते हुए यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ‘अजय कुमार लल्लू’ ने बताया कि अन्नदाता किसान भाजपा की किसान विरोधी नीतियों से त्रस्त होकर सड़कों पर उतर कर संघर्ष करने को विवश है। किसान की मांग को पूरा करने के बजाए भाजपा सरकार किसानों पर लाठीचार्ज, असूं गैस और पानी की बौछार से किसानों पर उत्पीड़न कर रही है और किसानों की आवाज को दबाना चाहती है।

वहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव ‘प्रियंका गांधी’ ने भी बिल के खिलाफ और सरकार की बर्बरता पर ट्वीट कर कहा कि भाजपा सरकार में देश की व्यवस्था को देखिए जब भाजपा के खरबपति मित्र दिल्ली आते हैं तो उनके लिए लाल कालीन डाली जाती है। मगर किसानों के लिए दिल्ली आने के रास्ते खोदे जा रहे हैं| दिल्ली किसानों के लिए कानून बनाए वो ठीक मगर किसान अपनी बात को सुनाने दिल्ली आए तो वह गलत।

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