गोरखपुर में चल रहा दवाओं का अवैध व्यापार

यूपी में स्वास्थ सेवाओं की स्तिथि बेहद खराब हो चुकी है। ऐसी ही खबर गोरखपुर की है जहां सरकारी अस्पतालों में दवाओं का काला बाजार तेजी से चल रहा है। प्रधानमंत्री ने भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत दवाइयों को सस्ते पैमाने पर लोगों के बीच लाने के लिए बनाई थी पर आज उन्ही औषधि केंद्रों पर दवाइयों के अभाव का ताला लटक रहा है।

केंद्रों पर लगभग 1200 किस्म की जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध होनी चाइए जबकि 200 से अधिक दवाइयां उपलब्ध ही नहीं है। जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों के बीच पैसे का अंतर जमीन आसमान का है। इस अंतर को खत्म करने और तत्काल बेहतर इलाज के उद्देश्य से लाए गए परियोजना सही प्रकार से काम नहीं कर पा रहा है समाज में कुछ ऐसा तबका भी है जो ब्रांडेड दवाइयों का सहारा नहीं ले सकता। ऐसे लोगों को जेनेरिक दवाइयां राहत देने का काम करती है। जबकि डॉक्टर और स्टाफ मेंबर अपने कॉमिशन के चक्कर में ब्रांडेड दवाइयों की ओर लोगों को धकेल रहे हैं।

प्रदेश में कुछ ही जगहों पर जन औषधि केंद्र होने की वजह से लोग ब्रांडेड दवाइयों का सहारा लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं। जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए लोगों ने बताया कि अस्पताल में दवाई उपलब्ध न होने की वजह से उन्हें ब्रांडेड दवाई लेना पड़ रहा और जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर है उन्हें निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में जन औषधि के संचालन ने बातचीत में बताया कि 4 माह पहले दवाइयों का आर्डर हुआ था पर अबतक दवाएं नहीं मिल पायीं है। दवाई के अभाव के कारण स्टाफ खाली बैठा रहता है और ग्राहकों को वापस लौटना पड़ रहा है।

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