जवाहरलाल नेहरु के जीवन से जुड़े रोचक किस्से

1. ये बात उस दौर की है जब पंडित नेहरू इंग्लैंड के हैरो स्कूल में पढ़ रहे थें। एक दिन सुबह नेहरू जी अपने जूते में पॉलिश कर रहे थे तभी अचानक उनके पिता मोती लाल नेहरू वहां पहुंच गए। जवाहरलाल नेहरू को जूतों पर पॉलिश करते देखा तो उन्हें अच्छा नहीं लगा, उन्होंने नेहरू जी से कहा- क्या यह काम तुम नौकरों से नहीं करा सकते? तभी जवाहरलाल नेहरू ने उनसे बड़ी शालीनता से कहा जो काम मैं खुद कर सकता हूं तो उस काम को नौकरों से क्यों कराऊं। नेहरू जी का कहना था की इन छोटे-छोटे कामों से ही आदमी आत्मनिर्भर होता है

2. पंडित जवाहरलाल नेहरू लखनऊ के सेंट्रल जेल में थें। जेल में खाना तैयार होने के बाद मेज पर रख दिया जाता था और सब एक साथ होकर खाना खाते थे तभी टेबल पर एक साथ सात लोग बैठ गए तीन आदमी नेहरू जी तरफ और चार आदमी दूसरी तरफ नेहरू जी और चंद्रसिंह गड़वाली आमने-सामने थें। खाना खाने के दौरान चीनी की जरूरत पड़ी और चंद्रसिंह ने सोचा आलस्य करना ठीक नहीं है और अपना ही हाथ आगे बढ़ा दिया जाये। चंद्रसिंह जैसे ही अपना हाथ बढ़ाते है कि नेहरू जी ने उनका हाथ रोक दिया और कहा- बोलो तो उत्तर में चंद्रसिंह ने कहा जवाहर शुगर (पॉट बर्तन) दो तभी अचानक नेहरू जी गुस्सा हुए और शांत भी गये और समझाने लगे हर काम के साथ शिष्टाचार जरूरी है। नेहरू जी ने उन्हें बताया भोजन की मेज का भी अपना शिष्टाचार है| यदि कोई चीज़ हाथों से दूर है तो उसे पास बैठे हुए व्यक्ति से कहना चाहिए कृपया इसे देने का कष्ट करें। शिष्टाचार पर नेहरू जी सभी को नसीहत देते थे।

3. एक समय की बात है एक बच्चे ने नेहरू जी के सामने ऑटोग्राफ पुस्तिका रखी और कहा इसपर हस्ताक्षर कर दीजिये तभी बच्चों ने ऑटोग्राफ देखा और कहा इसमें तो अपने तारीख लिखी ही नहीं है। नेहरू जी ने उर्दू अंको में तारीख लिख दिया फिर बच्चों ने कहा ये तो उर्दू में है नेहरू जी ने जवाब दिया आपने साइन अंग्रेजी शब्द में कहा मैंने अंग्रेजी में कर दिया और तारीख उर्दू में कहा तो मैंने उर्दू में कर दिया नेहरू जी का बच्चों के प्रति ऐसा था विनोदप्रियता का लहजा।

4. जनवरी 1950 में कांग्रेस का 55वां अधिवेशन जयपुर में होने जा रहा था। स्वतंत्र भारत का पहला अधिवेशन होने के कारण काफी भारी संख्या में कार्यकर्ता एक जुट हो गए जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। सैकड़ों लोग बर्फ सी ठंडी रेत पर सोने के लिए मजबूर थे। जिसकी सूचना किसी ने नेहरू जी को दे दी और रात 10 बजे वे वहां जा पहुंचे| किसी ने कहा अचानक इतनी संख्या में लोग आ गये की हम मजबूर हो गए। तभी जवाब में नेहरू जी ने कहा मैं कश्मीरी हूं और मैं भी यहीं खुले में सोऊंगा। फिर तुरंत बल्लियां गाड़कर उसपर चटाई बिछाने का काम शुरू हो गया और देखते ही देखते रात के 2 बजे तक पूरे मैदान में चटाई बिछा दी गई।

5. फ़रवरी 1950 की बात है जब पहली बार नेहरू जी पिलानी गए। उनके स्वागत में वहां लोगों ने रेगीस्तान में हरी सब्जी, गाजर, मूली आदि से बनाए गए स्वागत द्वारों पर बोले ये क्या बेवकूफी है? इसी के तुरंत बाद सारी सब्जियां उतारकर ग्रामिणों में बांट दी गई।

6. नेहरू जी की शोभायात्रा घोडों पर निकली। नेहरू जी के बार-बार अनुरोध के बाद भी घनश्यामदास बिड़ला उनसे आगे निकल जा रहे थे तभी अचानक नेहरू जी चिल्लाएं और कहने लगें तो घनश्यामदास फिर हॉर्स रेस ही हो जाए और अपने घोड़े को ऐड़ लगाकर खूब आगे निकल गए जिसके बाद घनश्यामदास बिड़ला जी उनसे आगे कभी नहीं निकल पाएं।

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