टैक्सी और ट्रांसपोर्टर यूनियन के बाद किसानों को मिला बिजली इंजीनियरों का साथ

किसान आन्दोलन के बीच ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने बिजली संशोधन को वापस लेने के साथ-साथ किसान आन्दोलन को समर्थन देने की बात कही है|

फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे किसान के नए कृषि कानून को वापस लेने के साथ बिजली विधयक संशोधन को वापस लेने की मांग की गई है| दुबे ने किसान को समर्थन देने की बात कही है|

उन्होंने बताया कि बिजली संशोधन विधेयक जारी होने के बाद इंजीनियर्स ने इसका पूर्ण जोर विरोध किया था| शैलेंद्र ने बताया की सरकार विधेयक के तहत किसानों को बिजली पर मिल रही सब्सिड़ी ख़त्म कर दिया जाए और अन्य उपभोक्ता सहित किसानों को बिजली के कम मूल्य से बिजली न दी जाए|

बता दे की बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश के विधुत कर्मचारियों पहले ही हड़ताल पर बैठ कर इसका विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं|

बिजली विधेयक में प्रावधान दिया गया है की सरकार चाहे तो बिजली की सब्सिडी सीधा किसान के खाते में भेज सकती है पर ऐसा करने के लिए किसानों को पिछले बिल का भुख्तान करना होगा जो किसानों के लिए संभव नहीं है|

उन्होंने ये भी कहा की बिजली विधेयक संशोधन के जरिये सरकार इसको निजी हाथों में देना चाहती है और जिसके बाद बिजली की दरें किसान से काफी दूर हो जाएंगी इन संभावनाओं के साथ किसानों का साथ देने की बात कहा है|

आठ दिसंबर से किसानों के समर्थन में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने दिल्ली जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश और राजस्थान समेत पूरे उत्तर भारत में ट्रांसपोर्ट रोकने की बात कही है|

बीते दिनों किसानों के समर्थन में आए ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट ने चेतावनी दी थी की कृषि के कानून को लेकर किसानों की मांग पूरी नहीं होती है तो हम हड़ताल पर जाएंगे|

बता दे नए कृषि कानून को लेकर किसानों में भय है की सरकार इस कानून के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्थ को ख़त्म कर देगी जिसके बाद किसानों को व्यापारियों के रहें पर जीना पड़ेगा|

दूसरी ओर किसान और सरकार के बीच हुई बैठक में सरकार की ओर कानून में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं करने की बात कह चुकी है|

 

 

 

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