दलित बेटी के शव को रात में जलाने का फैसला सही- सरकार

हाथरस मामले में दो तारीख को हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंड पीठ ने सरकार से वहां के वर्तमान डीएम प्रवीण कुमार को न हटाने पर सरकार से सवाल पुछा गया।

जवाब में सरकार की ओर से डीएम को न हटाए जाने के चार कारण देते हुए पीड़िता का रात में दाह संस्कार के फैसले को सही ठहराने की कोशिश की गई है।

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ के समक्ष सरकार के अधिवक्ता एमवी राजू ने कहा कि हाथरस के डिएम ने कुछ भी गलत नहीं किया है| इससे पहले 25 नवंबर को हुई सुनवाई में सरकार से पुछा गया था की डीएम को वहां पर बनाये रखने का क्या निर्देश है।

मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने बताया कि मामले पर गौर करने के बाद सरकार ने डीएम को न हटाने का निर्णय लिया गया है।

पहले कारण में अधिवक्ता ने मामले को राजनीतिक एंगल देने की बात कही है| दूसरे में बताया की जाँच में मिले साक्ष के अनुसार, डीएम की ओर से किसी भी प्रकार से छेड़छाड़ की बात सही नहीं है| तीसरा पीड़ित परिवार की सुरक्षा सीआरपीएफ के हाथ में है| चौथे में बताया की मामले की जाँच सीबीआई कर रही है।

14 सितंबर को अनुसूचित जाती की युवती के साथ दुष्कर्म हुआ था। जिसके बाद 29 सितंबर को युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

 

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