सरकार और किसानों के बीच दसवें दौर की बैठक आज, पहले 9 बार की बैठक रही बेनतीज

नए कृषि कानून को लेकर सरकार और किसानों के बीच कोई भी ठोस हल नहीं निकल पाया है| केंद्र सरकार और किसानों के बीच पहले भी कई बार की वार्ता हो चुकी है| किसान संगठन का कहना है की सरकार तीनों कृषि कानून को वापस ले तभी ये आन्दोलन समाप्त होगा| वहीं कई बार की वार्ता के बाद सरकार ने स्पष्ट किया था कि कानून को किसी भी हाल में वापस नहीं लिया जाएगा| जिसको लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि विपक्ष किसानों को बरगलाने की कोशिश कर रही है|

आज यानी बुधवार को एक बार फिर से केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वे दौर की बैठक होनी है| पहले हुई 9 बार की बैठक में कोई भी ठोस हल नहीं निकल पाया था| सरकार और किसानों के बीच की बैठक दो बजे होनी है| ये बैठक मंगलवार को होनी थी, मगर इसे अंतिम वक्त पर टाल दियता गया था| 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को भी लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है|

वहीं सरकार का कहना है कि कुछ अलग विचारधारा के लोग किसानों को बरगलाने की कोशिश कोशिश में लगे हैं| सरकार ने ये भी दावा किया है कि ये तीनों कृषि कानून किसानों के हित के लिए बनाया गया है| सरकार का कहना है कि मसला सुलझने में देरी इसलिए हो रही है क्यूंकि किसान संगठन इसका समाधान अपने हिसाब से चाहते हैं| सरकार ने कहा की जब भी किसी अच्छे कार्य के लिए कदम उठाया जाता है तो उसमें अड़चने आती हैं|

विज्ञान भवन में कृषि मंत्रालय के बयान में कहा गया कि किसान संगठनों और कृषि मंत्रियों के बीच होने वाली वार्ता मंगलवार की जगह 20 जनवरी को दो बजे होगी| उच्चतम नयायालय द्वारा मामले को सुलझाने की दृष्टि से गठित समिति ने मंगलवार को अपनी पहली बैठक की| कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा 40 किसान संगठनों को एक पत्र में कहा कि किसान संगठनों की वार्ता केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ 19 जनवरी को होनी थी| किसी कारणों से बैठक को टालना जरूरी हो गया| विज्ञान भवन में बैठक अब 20 जनवरी को दोपहर दो बजे होनी है| बैठक में सभी की उपस्तिथि के लिए आग्रह किया जाता है|

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का कहना है कि किसानों और सरकार के बीच का हल पहले ही निकल गया होता पर जबसे इसमें नेता शालिम हो चुके है तब बात कुछ और निकलकर आ रही है| किसानों से सीधी वार्ता होती तो जल्द समाधान हो सकता था| लेकिन इसमें अब अलग विचारधारा के लोग शामिल हो चुके हैं, इसलिए किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा रहा है|

किसान लगभग दो महीने से लगातार दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर पर लगातार आन्दोलन कर रहे है| केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने डिजिटल के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ये तीनों कृषि कानून किसानों के हित के लिए है| उन्होंने कहा की कृषि कानून को पिछली सरकारें भी लागू करना चाहती थी पर दबाव में वो ऐसा नहीं कर सकीं| उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कड़े निर्णय लेते हुए ये कानून लेकर आई है| उन्होंने ये भी कहा कि जब भी किसी अच्छे काम को किया जाता है तो उसमें अड़चने भी आती हैं|

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