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रक्षा नीति

इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान में चल रहे राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए अप्रैल में ही मीटिंग बुलाई थी। उस मीटिंग में थलसेना प्रमुख सैम मानेकशॉ थे। इंदिरा गाँधी के पूछने पर की क्या हम युद्ध की नौबत आने पर तैयार हैं ? इस पर मानेकशॉ ने युद्ध के लिए तैयारियों न होने व परिस्थिति प्रतिकूल न होने को  कारण बता कर मना कर दिया। उनके प्रमुख कारणों में से एक था मानसून।  मानसून आने को था, बारिश में बांग्लादेश में युद्ध करना मुश्किल हो जायगा क्योकि वहाँ नदियों में उफान बढ़ जाता है साथ ही बांग्लादेश डेल्टा के किनारे स्थित है जिसकी वजह से वहां का क्षेत्र दलदली हो जाता है जिसमें युद्ध मुश्किल है।

सैम मानेकशॉ और इंदिरा गाँधी की रणनीति के अनुसार 4 प्रमुख काम हुए-

पहला- अपनी सेना को युद्ध के लिए प्रयाप्त समय देना  और युद्ध के लिए किसी भी परिस्थिति में तैयार रहने के लिए ट्रेनिंग देना।  तय हुआ की नवंबर से पहले युद्ध न हो इसके प्रयास हो।

दूसरा- पाकिस्तान को अंदर  से कमज़ोर करने के लिए पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति वाहिनी को मदद करना , इसमें ट्रेनिंग , हथियार की सप्लाई शामिल थी।

तीसरा- भारत पश्चिम की ओर  डिफेन्स  करेगा और पूर्व की ओर अटैक करेगा। पूर्व पाकिस्तान पर भारत ने तीन तरफ से अटैक किया।

चौथा- भारत अन्य देशो के साथ विशेष कर रूस से सुरक्षा संधि करेगा।  इसके अंतर्गत भारत ने रूस के साथ एक 20 वर्षीय मैत्री समझौता किया। यह एक आर्मी ट्रीटी थी जिसमें दोनों देश एक दूसरे की वॉर की स्थिति में सहायता करेंगे। किसी भी देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जायेगा।

साथ ही इंदिरा गाँधी ने भारत के ऊपर से उड़ने वाले जहाज़ों पर रोक लगा दी थी, जिससे पश्चमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान के लिए सप्लाई बंद हो गयी। प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की यह चारो रणनीति कामयाब रही। पाकिस्तान को युद्ध में हारने के क्रम में इनका बहुत बड़ा योगदान था।

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