किसानों के 8 नवंबर को भारत बंद का, कई सियासी दलों ने किया समर्थन का एलान

कृषि कानून को लेकर किसानों का संघर्ष अब भारत बंद तक पहुंच गया है| 8 नवंबर को किसानों ने नए कृषि कानून को लेकर भारत बंद का ऐलान किया था| किसानों के समर्थन और सरकार के खिलाफ अब कई सियासी दलों ने भी कृषि कानून को लेकर किसानों के भारत बंद के समर्थन का एलान किया है|

सियासी संयुक्त दलों ने कृषि कानून को लेकर कहा की संसद में बिना वोटिंग और विचार के पास किये गये कृषि कानून खाद सुरक्षा पर खतरा है| ये कानून किसानों के कृषि को तबाह करने के लिए बनाया गया है| सरकार किसानों के अधिकारों को उनसे छीनने की कोशिश कर रही है|

खेलों के स्वर्ण पदक विजेता समेत 30 दिग्गजों ने किसान आन्दोलन का समर्थन करते हुए द्रोणाचार्य और अर्जुन सम्मान वापस करने का एलान किया है|

केंद्र सरकार को किसानों के लोकतांत्रिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अन्नदाता किसानों की मांग पर ध्यान देना चाहिए| इस पर बयान देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत कई राजनितिक दलों ने हस्ताक्षर किये|

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेडा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में सभी जिला व राज्य के मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी|

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के भी समर्थन देते हुए किसानों की मांगों को सही ठहराया है| साथ ही टीएमसी और राजद ने भी किसानों का समर्थन करते हुए भारत बंद का समर्थन करने का एलान कर दिया है|

वहीं दूसरी तरफ किसानों के आन्दोलन के बीच कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बयान दिया है कि कृषि कानून किसानों के हक़ में है इसे वापस नहीं लिया जायेगा| बताया की देश के असली किसान कानून का समर्थन कर रहे और खेतों में काम कर रहे| कुछ दलों ने राजनितिक फायदे के वजह से किसान के मुद्दे को राजनीतिक मोड़ दे दिया है|

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