अखिलेश यादव ने ट्वीट कर भाजपा सरकार को घेरा, किसानों के साथ भाजपा का रवैया निंदनीय

कड़ाके की ठंड और कोरोना महामारी के बीच लगातार किसान कानून के खिलाफ धरने पर बैठा हुआ है| सरकार और किसानों के बीच में कई बार की वार्ता में कोई निष्कर्ष नहीं हो पाया है| किसान के नेताओं ने सरकार के सभी प्रस्ताव का बहिष्कार कर दिया है|

इस बीच सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा की आज़ादी के बाद ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि किसान इतनी ठंड में सड़कों पर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने को मजबूर है, लेकिन कोई भी किसानों की बात को सुनने को तैयार नहीं है|

अखिलेश ने बयान जारी करते हुए कहा कि किसानों का आन्दोलन लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का भी आन्दोलन है| उन्होंने कहा की भाजपा के इस प्रकार के कृत्य से लोकतंत्र को बचाने के लिए देश की जनता अपनी भावनाओं के साथ किसानों के साथ आगे आ रही है|

उन्होंने कहा की भाजपा अपने एक एजेंडे पर चल रही है जिसका काम केवल जनता को धोखा देना है| भाजपा सरकार केवल ग्रामोंफोन की अटकी सुई की तरह है जो थोड़ा बजकर रुक गई है| जनता के कामों में भाजपा अपनी कोई भी भूमिका नहीं रखती है| भाजपा का किसानों को लेकर ऐसा चेहरा ये बताता है की सरकार को किसानों की कोई भी चिंता नहीं है|

जबकि गुरुवार को किसानों के आन्दोलन के समर्थन में किसान यात्रा चौथे दिन भी जारी रही| उन्होंने कहा यात्रा के दौरान पुलिस ने सपा के कार्यकर्ताओं पर बल का प्रयोग किया साथ की कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ़्तारी के साथ नजरबंद भी किया गया| मैनपुरी, आगरा, कुशीनगर, बहराइच, समेत प्रदेश के कई जिलों में बैलगाड़ी और ट्रैक्टर  के साथ यात्राएं निकाली गई|

वहीं किसानों के आन्दोलन को लेकर उन्होंने ट्वीट कर भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि सड़कों पर ठिठुरते आंदोलनकारियों की जायज़ माँगों को लेकर भाजपा सरकार हृदयहीन रवैया अपनाकर किसानों की घोर उपेक्षा कर रही है| इस पर जो वैश्विक प्रतिक्रिया आ रही है, उससे दुनियाभर में भारत की लोकतांत्रिक छवि को गहरी ठेस पहुँची है| भाजपा सरकार पोषण करनेवालों का शोषण करना बंद करे|

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