1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम, साहस को जानने के लिए खबर पर क्लिक करें

वायु सेना

1971 की जंग में भारतीय वायुसेना ने लगभग 4000 से अधिक उड़ानें भरीं जबकि पाक वायुसेना ने उसके मुकाबले आस पास भी नहीं भटक पाई थी। वायुसेना के कुछ ऐसी ही जाबांज कहानियों को आज हम आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

लोगेंवाला

वायुसेना के सिर्फ 2 हंटर लड़ाकू विमानों ने लोंगेवाला में 36  टैंक और 500 व्हीकल  मार गिराए  थे। जैसलमेर एयरबेस पर उस वक्त सिर्फ 4 हंटर एयरक्राफ्ट और सेना के ऑब्जर्वेशन पोस्ट के दो विमान थे। हंटर एयरक्राफ्ट रात के अंधेरे में हमला नहीं कर सकते थे। अब इंतजार सुबह का था। सुबह ही 2 हंटर विमान लोंगेवाला की तरफ निकल पड़े। उस वक्त रोशनी इतनी कम थी कि आसमान की ऊंचाई से जमीं का अंदाजा लगा पाना मुश्किल था। तब न तो नेविगेशन सिस्टम इतना मॉडर्न था और न ही कोई लैंडमार्किंग थी। ऐसे में दोनों विमान जैसलमेर से लोंगेवाला तक जाने वाली सड़क के रास्ते को देखते हुए आगे बढ़े थे और धूल के गुबार में छिपे पाकिस्तानी टैंकों को निशाना बनाया था। इसमें पाकिस्तान के 200 सैनिक मारे गए थे।

लेफ्टिनेंट जनरल निर्मलजीत सिंह का प्लान

पूर्वी पाकिस्तान की सेना तथा अधिकारियो पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए ढाका के ऊपर 5000 एयर ड्राप उतार दिए जिनमे सेना के जवान कम पुतले ज्यादा थे।  आग में घी का काम बीबीसी ने किआ , बीबीसी ने सम्बंधित खबर को प्रमुखता से छाप दिया जिससे पूर्वी  पाकिस्तानी सेना का मनोबल पस्त हो गए।

पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर के घर पर बमबारी

भारतीय वायुसेना ने 14 दिसंबर को पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर के घर पर बमबारी करके तहस-नहस कर दिया। जहाँ सभी पाकिस्तानी अधिकारियो की गुप्त मीटिंग होने वाली थी।  इस अचानक हमले से घबराये गवर्नर AH मलिक ने अपना त्याग पत्र दे दिया।  भारतीय वायुसेना की यह जीत थी।

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