Farmers Protest: दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर फौलाद की तरह डटे हैं किसान, बेटी की शादी, भतीजे की मौत…फिर भी नहीं टूट रहे हौसले

पूरे देश में इस समय दिल्ली बॉर्डर पर पिछले चार दिनों से डटे किसानों की चर्चा है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान संगठनों ने बुराड़ी मैदान में जाने के बाद बातचीत शुरू करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अपनी जायज मांगों के लिये सरकार से सीधे व्यवस्था को आईना दिखाने वाले किसान अपनी तमाम निजी परेशानियों के बावजूद हार नहीं मान रहे हैं। आंदोलन में हर किसान की अपनी अलग कहानी है। अपना हक प्राप्त करने के लिये वे सब छोड़कर आए हुए हैं। सामने आ रही जानकारियों के अनुसार इनमें से कई किसानों के घर शादी है तो किसी के घर बुरा हादसा हो गया है फिर भी वे आंदोलन को बीच में नहीं छोड़ रहे हैं।

परिवार को सौंपी जिम्मेदारी
अमरोहा के सुभाषचंद का कहना है, ‘अगले सप्ताह बेटी की शादी है। वहां पत्नी और बच्चों को काम सौंपकर आया हूं। आज मैं जो भी हूं, खेती के कारण हूं, इसलिए मेरा पहला धर्म यहां के लिए बनता है। शादी के सभी इंतजाम करवा दिए हैं। दोनों तरफ पूरी जिम्मेदारी है, जिसे मैं निभा रहा हूं। यहां ज्यादा दिन लगे तो घरवालों से कहा है कि विडियो कॉल पर शादी दिखा दें।’

बेटे की शादी
‘मैं बागपत से यहां पहुंचा हूं। ये आंदोलन हम किसान भाइयों के लिए जरूरी है। अगले हफ्ते मेरे बेटे की शादी है। घर के दूसरे सदस्यों को इसकी जिम्मेदारी देकर आ गया हूं। चौधरी नरेंद्र कहते हैं कि यहां किसान भाइयों को मेरी ज्यादा जरूरत है। किसान होकर मैं ही यहां नहीं रहूंगा तो हक के लिए कैसे बाकियों को हिम्मत मिलेगी।’

भतीजे की मौत फिर भी आंदोलन में डटे हुए
बिजनौर से आ रहे समरपाल बताते हैं, ‘मैं यहां जैसे ही आ रहा था, वैसे ही घर से संदेश मिला कि भतीजे की मृत्यु हो गई है। मैं आधे रास्ते आ चुका था। अपने किसान भाइयों को देखा तो सोचा कि भतीजा भी यही चाहता था कि हमें इंसाफ मिले, इसलिए मैंने अपने पैर पीछे नहीं किए। यूपी गेट बॉर्डर पहुंचा और यहां दो दिन से आंदोलन में हूं।’

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