सरकार को किसानों के नहीं उद्योगपति और पूंजीपतियों के सुख-दुख से मतलब है- अखिलेश

सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों को लेकर कहा कि सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है| किसानों के बिना सहमती के बनाए गए कानून किसानों पर अत्याचार है| सरकार किसान और खेती को छोड़कर बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के विकास में लगी है| किसानों पर हो रहा अत्याचार निंदनीय है|

किसानों के आन्दोलन को लगातार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है| उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहले ही नोटबंदी, जीएसटी, श्रमकानून के जरिए पूंजीपतियों के विकास में लगी थी और अब नए कृषि कानून के जरिए किसानों के अधिकारों को मारना चाहती है और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाह रही है|

रविवार को अखिलेश ने बयान जारी करते हुए कहा कि किसान का मक्का तो सस्ता है पर उसका बीज महंगा| उन्हें बीज पर सब्सिडी चाहिए| अखिलेश ने कहा प्रदेश में गन्ना किसानों का 10 हजार करोड़ रुपए बकाया है| उन्होंने कहा कि अकेले बंदा में 7065 किसानों का भगतान बाकी है| अखिलेश ने कहा कि धान क्रय केंद्र हर जनपद में उपलब्ध नहीं और जहां उपलब्ध है वहां खरीद नहीं हुई| धान का निर्धारित समर्थन मूल्य मुख्यमंत्री जी की कागजी बयानबाजी बनकर रह गई|

अखिलेश ने कहा कि सरकार को किसानों के दुख से कोई मतलब नहीं है, सरकार किसानों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना चाहती है|

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