इंदिरा गांधी के जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से, जिन्हें आपने कभी नहीं सुने होंगे

आयरन लेडी’, ‘दुर्गा’ ये कुछ ऐसी उपाधियां हैं जिन्हें देश की सबसे ताकतवर और पक्के इरादों वाली नेत्री पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिये इस्तेमाल किया जाता है। उनके शासनकाल के दौरान 1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी और विजय हासिल की। इस युद्ध में पाकिस्तान के साथ अमेरिका और चीन जैसे देश खड़े थे लेकिन इंदिरा जी के नेतृत्व और भारतीय सेना के पराक्रम ने दुश्मनों को ऐसी पटखनी दी कि पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए।

नरसंहार के खिलाफ भारत

पाकिस्तान सरकार और सेना, पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर जुल्म ढा रही थी। तब अपनी जान बचाने के लिए करीब 10 लाख लोग भाग कर भारतीय राज्यों में आ गए। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर इस बात का दबाव बढ़ रहा था कि वो इस मसले का जल्दी हल निकालें। इंदिरा जी ने एक तरफ भारतीय फौज को युद्ध की तैयारी करने का आदेश दे दिया और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाने की तैयारी की। पाकिस्तान ने चीन और अमेरिका के दम पर विमानों से भारतीय हवाई सीमा में दखलअंदाज़ी शुरू करी। इस पर भारत ने पाकिस्तान को अपनी हद में रहने की चेतावनी दी।

अमेरिका को इंदिरा जी की चेतावनी

इंदिरा जी ने अमेरिका को ये साफ कर दिया था कि अगर अमेरिका,  पाकिस्तान को नहीं रोकेगा तो भारत पाकिस्तान पर सैन्य कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान की तरफ अमेरिका के नरम रवैए को देखते हुए इंदिरा जी ने सोवियत संघ के साथ समझौता करके ये सुनिश्चित किया कि दोनो देश एक दूसरे की सुरक्षा में सहायता करेंगे।

इंदिरा गांधी के पक्के इरादे

भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार थी। युद्ध का माहौल बनता जा रहा था पर असमंजस थी कि पहला हमला कौन करेगा। तभी 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी विमानों ने भारत के कुछ शहरों पर बमबारी करने की गलती कर दी। इंदिरा जी ने भारतीय सेना को ढाका की तरफ बढ़ने का हुक्म दे दिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना की नाकेबंदी की और दिसंबर, 1971 को आपरेशन ट्राइडेंट शुरू हुआ।  पाकिस्तान को पूरी तरह से घेर कर इंदिरा गांधी ने स्पष्ट कर दिया कि बांग्लादेश अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बल्कि एक स्वंतत्र राष्ट्र होगा।

बेमिसाल विदेश नीति

अमेरिका ने पाकिस्तान की तरफ से अपनी नौसेना का सबसे शक्तिशाली सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी की तरफ भेजा। जवाब में इंदिरा जी ने सोवियत संघ के साथ हुए समझौते का फायदा उठाते हुए अपने जंगी जहाजों को हिंद महासागर में भेजा। इंदिरा जी ने फैसला लिया कि अमेरिकी बेड़े के भारत के करीब पहुंचने से पहले पाकिस्तानी फौज को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जाए।

युद्धविराम की जगह कराया सरेंडर

भारतीय सेना ढाका को 3 तरफ से घेर चुकी थी। पाकिस्तान गवर्नर के घर पर हमले के बाद पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने तुरंत युद्ध विराम का प्रस्ताव भिजवा दिया। लेकिन भारतीय थलसेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ ने साफ कर दिया कि अब युद्ध विराम नहीं बल्कि सरेंडर होगा। कोलकाता से भारत के पूर्वी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ढाका पहुंचे।  अरोडा और नियाज़ी एक मेज़ के सामने बैठे और 16 दिसंबर 1971 की दोपहर सरेंडर के प्रतीक के तौर पर नियाजी ने अपना रिवॉल्वर जनरल अरोड़ा के हवाले कर दिया।

पाकिस्तान के सरेंडर के साथ ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ये एलान कर दिया। भारत ने सिर्फ 14 दिन में पाकिस्तानी फौज को हथियार डालने के लिए मजबूर कर दिया और इस तरह इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को तोड़ दिया उसके 2 टुकड़े कर दिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here