आन्दोलन का आज 14वां दिन, सरकार के प्रस्ताव को किसानों की नामंजूरी से बढ़ सकती है मोदी सरकार की मुश्किलें

लगातार नए कृषि कानून को लेकर सरकार और किसानों के बीच की बातचीत किसी नजीते तक नहीं पहुंच रही है| जिसके चलते आज 14 वें दिन भी किसान दिल्ली के सभी बॉर्डर पर डटें हुए है| वहीं केंद्र सरकार ने बुधवार को 13 किसान संगठन को मसौदा प्रस्ताव भजकर उनके आशंकाओं को ख़त्म करने का प्रयास किया|

सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लिखित आश्वासन, मंडियों से बहार काम करने वाले व्यवसाइयों का पंजीकरण, उनपर कर व उपकर लगाने का प्रस्ताव दिया जिनको उन्होंने मना कर दिया| कृषि मंत्रालय के प्रस्ताव में कहा गया की किसानों को कृषि कानून को लेकर जो भी दिक्कतें है हम उसपर खुले दिल से विचार करने को तैयार हैं|

किसान संगठनों ने प्रेस वार्ता कर कहा हम सरकार के इस प्रस्ताव को निरस्त करते हैं| सरकार कृषि से जुड़े तीनों कानूनों को ख़त्म करे, वरना हम आन्दोलन और तेज करेंगे| वहीं किसान क्रांतिकारी यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पल ने पूरे देश में आन्दोलन तेज करने की बात कहते हुए कहा की 14 दिसंबर को पूरे देश में प्रदर्शन करेंगे|

अमूमन 12 तारिख को दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-जयपुर हाईवे को बंद किया जायेगा और भाजपा के  मंत्रियों के आवास और कार्यालयों का घेराव किया जायेगा| उन्होंने बताया की अगर सरकार मांगों को नहीं मानती है तो दिल्ली की सड़कों को भी बंद किया जायेगा इसके साथ ही अंबानी और अडानी के उत्पादों का बहिष्कार किया जायेगा|

किसान के मसले को लेकर सभी विपक्षी दलों ने बुधवार को राष्ट्रपति से मुलाकात की जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत 5 विपक्षी दल मौजूद रहें| जिसमें किसानों को लेकर केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का अनुरोध किया है|

मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा की हमने नए कृषि कानून को लेकर अपने रुख से राष्ट्रपति को औगत कराया साथ ही कहा की जिस प्रकार से कानून संसद में पास हुआ है वो किसानों का अपमान है| इसलिए किसान ठंड में आज सड़कों पर उतरा है|

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