वाराणसी के शीर गोवर्धन जन्मस्थली पहुंचकर महासचिव प्रियंका गांधी ने किया दर्शन, सत्संग में हुई शामिल

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी आज सन्त शिरोमणि रविदास जयन्ती के मौके पर वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली शीर गोवर्धन पहुंचीं। एयरपोर्ट से लेकर रास्ते भर हजारों की संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद| प्रियंका गांधी ने शीर गोवर्धन पहुंचकर सन्त रविदास के दर्शन किये और सत्संग में शामिल हुईं। पिछले साल भी प्रियंका गांधी ने संत शिरामणि के जन्म स्थान पहुंचकर दर्शन किया था।

इस मौके पर प्रियंका गांधी ने कहा कि आज यहां आकर आप सब उपस्थित हैं आप सबके सामने यहां बैठकर संत श्री निरंजन दास जी महाराज जिन्होंने स्वागत किया। आज संत शिरोमणि श्री रविदास महाराज जी की जयंती आप मना रहे हैं। इस बात पर मुझे बहुत खुशी हुई। संत निरंजन दास जी महाराज से मेरा दिल से लगाव है और आज यहां आपके सामने खड़े होकर मैं सिर्फ दो बातें कहना चाहती हूं कि संत रविदास जी ने जो धर्म सिखाया- वह सच्चा धर्म था, सच्चा धर्म है और उस धर्म को धारण करते हुए उसको आप निभाते हैं। वह एक सरल धर्म है। क्योंकि सच्चा धर्म हमेशा सरल धर्म होता है उसमें कोई राजनीति नहीं होती, कोई भेदभाव नहीं होता, किसी का संप्रदाय नहीं देखा जाता, जाति नहीं देखी जाती सिर्फ इंसानियत देखी जाती है और वह सच्चा धर्म जो होता है, जब आप दिल में उस धर्म को धारण करते हैं तो आपके दिल में, आपके मन में- दया का भाव, करुणा का भाव, सच्चाई का भाव और सेवा का भाव जागृत होता है। इसीलिए वह सच्चा धर्म कहलाया जाता है। जो सच्चा धर्म होता है वह कभी बैर नहीं रख सकता, कभी लोगों को अलग नहीं कर सकता, लोगों को तोड़ नहीं सकता। उसका स्वभाव यही होता है कि आपके मन को शीतल बनाता है, मन में करूणा जगाता है और लोगों को आपस में भाइयों-बहनों की तरह जोड़ता है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि मैं जानती हूं कि जब पिछले साल कोरोना शुरू हुआ, तब मेरी कोशिश थी कि उत्तर प्रदेश के जो कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं वह भी जनता की सेवा करें। खासतौर से लॉकडाउन हुआ था और तमाम लोग घर के लिए अपने गांव के लिए शहरों से पैदल रवाना हुए। उस समय भी जब हमारे लोगों ने रसोइयां खोलीं, सेवा की। तब आपका जो समाज है जहां-जहां आपके समाज के लोग थे आपने बहुत मदद की। इसके लिए भी मैं धन्यवाद देना चाहती हूं।

प्रियंका गांधी ने कहा कि मेरी आशा है कि संत शिरोमणि रविदास महाराज जी की जो ख्वाहिश थी कि आपसी प्रेम व सद्भाव हो और एक दूसरे की सेवा की जाए। यह ख्वाहिश राजनीति में भी कायम रहे। मेरी तरह जो लोग राजनीति में आते हैं, वह इसी सेवा भाव से देश की सेवा करें। एक बार मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देना चाहती हूं। आज आपका खास त्यौहार है, खास दिन है। आप सब यहां श्रद्धा पूर्वक आए हैं। मैं आपको शुभकामनाएं देती हूं, धन्यवाद देती हूं कि आपने इस देश में यह धर्म कायम रखा|

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